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August 18, 2026
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पेट्रोल-डीजल पर राहत का इंतजार खत्म? मंत्री ने साफ कहा—अभी नहीं घटेंगे दाम, वजह जानिए

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम जनता लंबे समय से किसी बड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठी है। हाल ही में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के दाम गिरे, तो हर किसी को लगा कि अब भारत में भी तेल के दाम कम हो जाएंगे। लेकिन अब इस पूरे मामले पर सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ा और साफ बयान सामने आ गया है।

अभी नहीं सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल, केंद्रीय मंत्री ने बताया कारण

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईंधन की कीमतें कम करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कई सालों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव का असर आम लोगों पर नहीं पड़ने दिया है। यही वजह है कि दुनिया भर में उथल-पुथल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी समय से लगभग एक जैसी और स्थिर बनी हुई हैं।

जानिए आखिर दाम कम करना क्यों संभव नहीं है?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसके पीछे की असली वजह भी समझाई है। उन्होंने बताया कि देश की सरकारी तेल कंपनियां अभी भी अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने में जुटी हैं। इसके साथ ही, कंपनियों के पास अभी वो स्टॉक भी मौजूद है, जिसे उस समय महंगे दामों पर खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं। ऐसे में अगर अभी तुरंत पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए जाते हैं, तो तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले चार सालों में भारत में पेट्रोल की कीमत में सिर्फ 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 6.23 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है, जो दुनिया के कई देशों के मुकाबले बेहद कम है। सरकार का साफ कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अभी कीमतें घटाना बिल्कुल भी सही फैसला नहीं होगा।

अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद नहीं रुकी तेल की सप्लाई

हरदीप सिंह पुरी ने देश को भरोसा देते हुए कहा कि हाल ही में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास काफी तनाव बढ़ गया था, जो दुनिया का एक प्रमुख तेल सप्लाई रूट है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर आंच नहीं आने दी गई। संकट के इस दौर में भी देश के करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप पूरे समय सामान्य रूप से काम करते रहे और कहीं भी ईंधन की किल्लत देखने को नहीं मिली। सरकार ने पहले से ही बैकअप और बेहतरीन प्लानिंग कर रखी थी, जिससे आम जनता को कोई परेशानी नहीं हुई। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकार ने खुद उठाया है, ताकि लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

भविष्य को लेकर क्या है सरकार का मास्टरप्लान?

सरकार अब हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठी है, बल्कि आने वाले समय के लिए देश की ऊर्जा व्यवस्था को और ज्यादा मजबूत बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए देश में नई रिफाइनरियां बनाई जा रही हैं और पुरानी रिफाइनरियों की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। सरकार का बड़ा लक्ष्य है कि साल 2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाकर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचा दिया जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो साल के भीतर कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे हो जाएंगे, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतें आसानी से पूरी होंगी। हालांकि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार ने यह साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत किसी राहत की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

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