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August 9, 2026
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एम्स, ऋषिकेश ने रचा इतिहास, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

गतवर्ष की गई थी अब तक के सबसे वजनदार बोन ट्यूमर की सफलतम सर्जरी

मरीज के पैर की जांघ से 35 किलोग्राम भार का ट्यूमर हटाकर दिया था जीवनदान

एम्स, ऋषिकेश के चिकित्सकों ने दुनियाभर के चिकित्सकीय इतिहास में अब तक के सबसे वजनदार ट्यूमर की सफलतम सर्जरी कर विश्व पटल पर देश एवं एम्स संस्थान का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि के लिए संस्थान की चिकित्सकीय टीम का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। विभिन्न विभागों के चिकित्सकीय दल ने उक्त सर्जरी को गतवर्ष जून-2025 में सफलतापूर्वक अंजाम दिया था।

गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश में 9 जून 2025 को संस्थान के वरिष्ठ शल्य चिकित्सकों की टीम द्वारा यह जटिल सर्जरी की गई थी, जिसमें एक 27 वर्षीय व्यक्ति के बाएं पैर की जांघ से लगभग 35 किलोग्राम के भारी ट्यूमर को सर्जरी की मदद से हटाने में सफलता हासिल की गई थी। इस जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम देने वाले ऋषिकेश एम्स संस्थान के चिकित्सकों की इस टीम में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित धींगरा, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अंशुमान दरबारी एवं बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुवरी वाथुल्या प्रमुखरूप से शामिल रहीं।

संस्थान की ओर से इस सबसे अधिक वजनी ट्यूमर की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने के बाद चिकित्सकीय दल की इस उपलब्धि से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस प्रकाशन को अवगत कराया गया था। जिसके बाद इंग्लैंड, लंदन से प्रकाशित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस, (जो कि विश्वभर में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के उपलब्धिपूर्ण कार्यों के संग्रह व उसके प्रकाशन से दुनिया को अवगत कराने वाली महत्पूर्ण बुक है,) की ओर से इस जानकारी का संज्ञान लिया गया और अपने स्तर से परीक्षण किया गया l परीक्षण में उक्त जानकारी सही पाए जाने पर एम्स,ऋषिकेश में अब तक के सबसे अधिक वजनदार बोन ट्यूमर की जटिलतम सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली चिकित्सकीय टीम की उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्णय लिया गया और एम्स, ऋषिकेश की चिकित्सकीय टीम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रशस्तिपत्र और मेडल से नवाजा गया है।

इस ऐतहासिक उपलब्धि पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे इतिहास गढ़ने की संज्ञा दी और कहा कि एम्स संस्थान मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है।

उल्लेखनीय है कि 35 किलोग्राम के सबसे अधिक वजनी बोन ट्यूमर की सफल शल्य चिकित्सा 9 जून- 2025 को एम्स ऋषिकेश में की गई थी, जबकि इससे पूर्व भारत के ही चिकित्सकों के एक दल ने वर्ष 2002 में उस वक्त के सबसे अधिक वजनी 16.5 किलोग्राम के ट्यूमर की सर्जरी की थी जिस रिकार्ड को अब तोड़ दिया गया है l

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