ऊत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने दून वैली में बिना स्लाटर हाउस के कट रही मछली व मुर्गे के मामले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति सुभाष उपाधयाय की खण्डपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि माननीय उच्च न्यायलय ने जो आदेश स्लाटर हाउसों के सम्बंध में वर्ष 2016-17 में दिये गए थे उनका अभी अभी तक कितना अनुपालन हुआ है। उसकी रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर न्यायलय में प्रस्तुत करें। अब मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। मामले के अनुसार देहरादून निवासी मोनिका मोसेस ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि नगर निगम देहरादून के द्वारा स्लाटर हाउसों के नियमो का पालन नही कराया जा रहा है। जबकि वर्तमान में मीट कारोबारी बड़े जानवरो को स्लाटर हाउस में काटकर बेच रहे हैं। परन्तु मछली व मुर्गी बिना स्लाटर हाउस के अपनी दुकानों में ही काट रहे है। जबकि फ़ूड इंस्पेक्टर के द्वारा इनकी जाँच तक नही की जाती। पूर्व में माननीय उच्च न्यायलय ने राज्य सरकार को निर्देश दिये थे कि बकरे, मछली, सुअर व मुर्गे की हत्या बिना स्लाटर हाउस के नही किया जाय। काटने से पहले उनका चिकित्सीय परीक्षण किया जाय। लेकिन अभी मछ्ली व मुर्गे बिना चिकित्सीय परीक्षण के बिना स्लाटर हाउस के खुले में काटे जा रहे है। जो उच्च न्यायलय , सुप्रीम कोर्ट के निर्देश व नगर पालिका व नगर निगम की नियमावली के विरुद्ध है। पूर्व कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि अगर किसी जानवर को कैद किया जाता है तो उसके लिए उसके शरीर के अनुसार पिजड़ा होना चाहिए। जीने का हक सबको है।
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बागेश्वर जिले में सरकारी जमीन व पुराने बंगलो पर हुए अतिकरण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने जिला अधिकारी बागेश्वर को निर्देश दीए हैं कि अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग ,लोक निर्माण विभाग व वन विभाग सहित सम्बंधित विभागों की एक कमेटी गठित करें। कमेटी नौ माह के भीतर अतिक्रमण हटा के अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। अब कोर्ट ने मामले की सुनवाई नौ माह बाद की तिथि नियत की है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने प्रसाशन से स्थिति से अवगत कराने को कहा था। आज जिला प्रसाशन की तरफ से कहा गया कि सरकारी भूमि व सार्वजनिक सम्पतियों पर अतिक्रमण हुआ है। सम्पतियों पर कब्जा करके लोगो ने होटल, होम स्टे व रिसोर्ट खोल दिए हैं। जिन लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया गया है । उन सभी को खाली करने का नोटिस दे दिया गया है। इसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि प्रसाशन ने केवल कोर्ट के आदेश पर फ़ॉरमल्टी अदा की है। जबकि हकीकत यह है कि अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। मामले के अनुसार गोपाल चंद वनवासी ने उच्च न्यायलय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि गरुड़, बागेश्वर, कौसानी व चौकोड़ी समेत अन्य स्थानों पर 20 से ज्यादा रिजाँर्ट मालिकों के द्वारा सरकारी जमीन व सरकारी सम्पतियों पर कब्जा करके उनमें रिजाँर्ट खोल दिये गए हैं। इस सम्बंध में याचिकाकर्ता ने अगस्त 2024 को इसकी शिकायत दर्ज की थी मगर रसूकदार होने के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पर्यटन सीजन के दौरान स्थानीय लोगो को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जब सड़क पर जाम गलता है तो एम्बुलेंस तक कई घन्टे जाम में फंस जाती है। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि सरकारी भूमि व सरकारी सम्पतियों से शिघ्र अतिक्रमण हटाया जाय।
















