हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, चौरास में ‘धरोहर संवाद 2025’ का भव्य आयोजन हुआ। इस विशेष कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, परंपराओं और साहित्य को संरक्षित करने का संकल्प दोहराया गया। आयोजन में पारंपरिक शिल्प, संस्कृति और विज्ञान का अनोखा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लोक-संस्कृति को संजोने के लिए ढोल-दमौ वादकों को निःशुल्क वाद्य यंत्र उपलब्ध करा रही है और ‘गोलज्यू यात्रा’ जैसी परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए राज्यभर में अभियान चलाया जा रहा है।
आयोजन का नेतृत्व कर रहे ‘धरोहर न्यास’ के अध्यक्ष विजय भट्ट ने बताया कि संस्था पिछले तीन वर्षों से जमीनी स्तर पर काम कर रही है। लोक साहित्य के विद्वानों, शोधकर्ताओं और कलाकारों से संवाद कर संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में एक विशेष ‘पुस्तक कुंभ’ भी लगाया गया, जिसमें उत्तराखंड की संस्कृति पर आधारित साहित्य को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम का भावनात्मक क्षण तब आया जब वरिष्ठ ढोल वादक मोहनराम अपनी तीन पीढ़ियों के साथ मंच पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि यह कला उनके परिवार में सात पीढ़ियों से चली आ रही है और अब उनका बेटा और पोता भी इसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि चारधाम यात्रा में भी उन्हें इसी लोक वादन के लिए आमंत्रित किया जाता है।
















