ऋषिकेश-अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 के उपलक्ष्य में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के पावन गंगा तट पर एक भव्य योग समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में विश्व के 25 से अधिक देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की इस वर्ष की थीम “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” रही, जो वैश्विक एकता और समग्र स्वास्थ्य के संदेश को दर्शाती है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने योग को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए कहा कि, “जब हम स्वयं का ध्यान रखते हैं, तभी हम पृथ्वी का भी ध्यान रखना शुरू करते हैं। वसुधैव कुटुम्बकम् का यही भाव योग के माध्यम से साकार होता है।”
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली है। उन्होंने कहा, “योग मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन बनाता है। यह भीतर की शांति और बाहरी गतिशीलता के बीच सामंजस्य स्थापित करने की कला है।”
कार्यक्रम में मिनिस्ट्री ऑफ यूथ एंड स्पोर्ट्स, योग एलायंस, उत्तराखंड की योगशालाएं, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षकों और हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। गंगा की लहरों की पृष्ठभूमि में जब मधुर संगीत के साथ सामूहिक योगाभ्यास आरंभ हुआ, तो वातावरण श्रद्धा, ऊर्जा और शांति से भर उठा।
योग अभ्यार्थी विनय कामरा ने कहा, “ऐसे पवित्र स्थान पर योग करना दिव्य अनुभव है।” वहीं जापान से आए योग साधक आबे ने कहा, “ऋषिकेश आकर योग करना मेरे जीवन का सबसे विशेष क्षण है।”


















